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एनसीटीई ने शिक्षा मित्रों को दी टीईटी से छूट: आज से एक साल पहले

उत्तर प्रदेश के एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को दीपावली से पहले ही बड़ा तोहफा मिला है. एनसीटीई ने शिक्षामित्रों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट दे दी है. वहीं, एनसीटीई के फैसले से शिक्षामित्र खुश हैं.


उन्हें उम्मीद है कि अब नौकरी के लिए शीर्ष अदालत की भी मंजूरी मिल जाएगी. सूबे में एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों की नियुक्ति एनसीटीई की टीईटी पास करने की अनिवार्यता के कारण खटाई में पड़ गई थी. अखिलेश यादव की सरकार ने शिक्षामित्रों को राहत पहुंचाने के लिए कई पत्र केंद्र को लिखे थे. इनमें शिक्षामित्रों को टीईटी में छूट देने की सिफारिश की गई थी.
उप्र के बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने कहा कि वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री रामशंकर कठेरिया से इस मामले को लेकर मिले थे. उन्होंने दोनों से मांग की थी कि शिक्षामित्रों को छूट दी जाए. इसके साथ ही उन्होंने और मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कई पत्र भी एनसीटीई और केंद्र सरकार को लिखे थे.

उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा है कि एनसीटीई ने यूपी सरकार की पहल पर शिक्षामित्रों को टीईटी से छूट देने का फैसला किया है.

बेसिक शिक्षा मंत्री के मुताबिक एनसीटीई से छूट मिलने के बाद अब सर्वोच्च न्यायालय से भी शिक्षामित्रों को राहत मिलने की उम्मीद है. कोर्ट से जो भी आदेश मिलेगा, उस पर उप्र सरकार अमल करेगी.
उल्लेखनीय है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी आए थे, तो उनसे शिक्षामित्रों के छह सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल भी मिला था. उस दौरान पीएम ने भरोसा दिया था कि केंद्र सरकार शिक्षामित्रों की मदद के लिए हर संभव कदम उठाएगी. इसके बाद यूपी में जगह-जगह हो रहे आंदोलन भी थम गए थे.

शिक्षामित्र संगठन के प्रदेश महामंत्री पुनीत चौधरी ने बताया कि एनसीटीई ने शिक्षामित्रों के हक में जो फैसला दिया है, वह स्वागत योग्य है. इससे कई गरीब शिक्षामित्रों का संघर्ष कामयाब हुआ है और उनके घर के ठंडे पड़े चूल्हे भी अब जल सकेंगे.

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