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चुभ रही वेतन विसंगति व कैशलेस इलाज में देर, कर्मचारियों को अपने मामले में सरकार सुस्त

लखनऊ : प्रदेश की नई सरकार बाकी मामलों और फैसलों में भले ही तेज हो, लेकिन राज्य कर्मचारियों को अपने मामले में सरकार की तेजी नजर नहीं आ रही है। बल्कि उनकी तो शिकायत ही यही है कि सरकार उनके मामले में देर कर रही है।
खास तौर से उन मामलों में, जिनमें पिछली सरकार ने समयबद्ध वादे किए थे। छठे वेतनमान की अब तक चली आ रही विसंगतियां हों या एक साल के लिए टाला गया सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान हो, नई सरकार के फैसले कर्मचारियों को चुभ रहे हैं, जबकि कैशलेस इलाज की सुविधा भी पहली मई से मिलने की संभावना नहीं है।1राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्र बताते हैं कि ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, गन्ना पर्यवेक्षक संवर्ग, प्रयोगशाला सहायक ग्राम्य, अर्बन मलेरिया फाइलेरिया संवर्ग, परिवहन निगम के कर्मचारी तथा सिंचाई विभाग में भी कुछ पदों के कार्मिकों की छठे वेतनमान की विसंगतियां अब तक दूर नहीं हो पाई हैं। अतुल बताते हैं कि जिन विभागों में सातवां वेतनमान लागू कर दिया गया है, वहां 2016 के एरियर की एक किश्त का भुगतान 2017 में करने का वादा किया गया था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि यह किश्त 2018 में मिलेगी। इसी तरह कैशलेस इलाज की सुविधा पहली मई से देने की बात कही गई थी, लेकिन इसके लिए अब तक न तो अस्पताल चिन्हित हुए और न ही एक भी कर्मचारी का कार्ड बन कर तैयार हुआ है।1कर्मचारी नेताओं के मुताबिक कैशलेस इलाज के लिए हेल्थ कार्ड का डेटा जुटाने और कार्ड बनाने का जिम्मा पहले एनआइसी को देने की योजना थी, लेकिन अब यह काम स्वास्थ्य बीमा योजना को सौंपा गया है। पहले इसके लिए शिविर लगाकर आवेदन पत्र भरवाने की सुविधा देने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसके लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म भरवाया जा रहा है।


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