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सरकार शिक्षामित्रों की समस्या के समाधान पर कर रही मंथन: बढ़ा हुए मानदेय के साथ भर्ती में वेटेज देने की तैयारी

एनबीटी ब्यूरो, लखनऊ शिक्षामित्रों का आंदोलन रुकवाने के बाद अब सरकार उनकी समस्या के समाधान पर मंथन कर रही है। फिलहाल फौरी राहत के लिए उनका मानदेय बढ़ाने और मूल या समायोजित विद्यालय में बने रहने के फॉर्म्युले पर चलने की तैयारी है। आगे कुछ और राहत दी जा सकती है।
शिक्षामित्र संगठनों की अपर मुख्य सचिव बेसिक आरपी सिंह और बाद में सीएम योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के दौरान दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने विकल्प रखे। सरकार के आश्वासन के बाद शिक्षामित्रों ने स्कूलों का रुख कर लिया है। अब बारी सरकार की है। सूत्रों के अनुसार 10 हजार रुपये मानेदय का विकल्प शिक्षामित्रों के सामने रखा गया था जिस पर वह तैयार नहीं थे। शासन इस मानदेय को कुछ और बढ़ाने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। तैनाती के सवाल पर सरकार सहमत है कि शिक्षामित्र मूल विद्यालय में काम करें या जहां वह समायोजित किए गए थे। जहां उनका सहायक अध्यापक के तौर पर तबादला हुआ था वह वहां भी पढ़ा सकते हैं। हालांकि, वेतन 11 महीने का ही मिलेगा जिससे संविदा की उनकी स्थिति बनी रहे।

शिक्षक भर्ती नियमावली में संशोधन: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार शिक्षामित्रों को उम्र व अंकों में वेटेज के लिए सरकार शिक्षक भर्ती नियमावली में संशोधन की तैयारी कर रही है। ताकि अर्हता की उम्र पार कर चुके शिक्षामित्रों को भी नई भर्ती में शामिल होने का मौका मिले। वहीं, कोशिश यह भी है कि वेटेज का फॉर्म्युला कुछ यूं रखा जाए कि शिक्षामित्र मेरिट की दौड़ में मजबूती से शामिल हो सकें। दरअसल, पिछले 17 सालों में मेरिट के पैटर्न में काफी बदलाव आ चुका है। स्टेप मार्किंग के बाद बोर्ड परीक्षाओं में ज्यादा नंबर मिलने लगे हैं। ऐसे में अगर वेटेज प्रक्रिया तार्किक नहीं बनाई गयी तो भर्ती में शिक्षामित्र कहीं ठहर ही नहीं पाएंगे।
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