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सीबीएसई की दोबारा परीक्षा के खिलाफ केरल का छात्र सुप्रीम कोर्ट आया, दिल्ली से भी उठी फैसला रद्द करने की मांग

नई दिल्ली, आइएएनएस/प्रेट्र : कक्षा दस की गणित विषय की दोबारा परीक्षा कराने के सीबीएसई के फैसले को केरल के छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उसने सीबीएसई के फैसले को अवैध करार दिया है।
दिल्ली में गणित का पेपर लीक होने के बाद सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजूकेशन) ने दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। दिल्ली के भी एक छात्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। 1 कोच्चि के चॉइस स्कूल के छात्र रोहन मैथ्यू ने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीएसई का फैसला संविधान की धारा 14 (कानून की नजर में सब बराबर), धारा 21 (मर्जी से जीने के अधिकार) और धारा 21 ए (शिक्षा के अधिकार) का उल्लंघन है। रोहन ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह गणित की कॉपियों का मूल्यांकन कराकर दसवीं कक्षा का परिणाम घोषित करने के लिए सीबीएसई को आदेश दे। साथ ही शीर्ष अदालत एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति गठित कर मामले की जांच का आदेश दे। रोहन की ओर याचिका पेश करते हुए उसके पिता संतोष मैथ्यू ने सीबीएसई के गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की है जिन्होंने देश के 16 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। संतोष मैथ्यू केरल हाई कोर्ट में वकालत करते हैं। कहा, दिल्ली में पेपर लीक होने की अपुष्ट सूचना के आधार पर सीबीएसई ने गणित विषय की परीक्षा रद कर दी और दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है।
दिल्ली से भी उठी फैसला रद करने की मांग : दिल्ली के शकरपुर इलाके में रहने वाले छात्र रीपक कंसल ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अन्य याचिका में सीबीएसई के बिना जांच के 12 वीं और 10 वीं कक्षाओं के अर्थशास्त्र व गणित पेपर रद करने पर सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई के इस फैसले से दसवीं के 16 लाख से ज्यादा जबकि 12 वीं के करीब 12 लाख छात्र-छात्र प्रभावित हुए हैं। याचिका में सीबीएसई के फैसले को असंवैधानिक और पूरी तरह से गैरकानूनी करार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट से फैसले को रद करने की मांग की गई है।

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