लखनऊ : राजस्व परिषद की मंशा परवान चढ़ी तो निकट भविष्य में किसी मूल
खातेदार किसान की मृत्यु होने पर उसके मृत पुत्र की अविवाहित पुत्री को भी
पैतृक संपत्ति में हक मिल सकेगा। अविवाहित पुत्री को संपत्ति का
उत्तराधिकार दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में संशोधन का है। राजस्व परिषद ने इस बाबत शासन को भेज दिया है।
राजस्व संहिता में अभी जो प्रावधान है, उसमें मूल खातेदार की मृत्यु होने
पर उसकी विधवा, अविवाहित पुत्री और पुत्रदि (पुत्र/पुत्र का पुत्र आदि)
उसकी संपत्ति के प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी होते हैं। अभी जो व्यवस्था
प्रचलित है, उसमें मान लीजिए कि मूल खातेदार की मृत्यु होने से पहले उसके
पुत्र की भी मौत हो चुकी है। ऐसी स्थिति में मूल खातेदार की मृत्यु होने पर
यदि उसके मृत पुत्र का एक पुत्र और एक अविवाहित पुत्री है तो संपत्ति पर
हक मृत पुत्र के पुत्र का ही होता है, अविवाहित पुत्री को इसमें हिस्सा
नहीं मिलता है। इसी तरह यदि दो भाइयों को मृत पिता की संपत्ति में हक मिला
है और इनमें से एक निसंतान है तो बाद में उसकी मृत्यु होने पर उसके भाई के
पुत्र का तो उसकी संपत्ति पर उत्तराधिकार है लेकिन भाई की अविवाहित पुत्री
(भतीजी) का नहीं।
राजस्व परिषद ने इस विसंगति को दूर करने के लिए खातेदार की मृत्यु होने पर
उसकी संपत्ति पर उसके मृत पुत्र की अविवाहित पुत्री को भी पुत्र के समान
उत्तराधिकार देने के लिए राजस्व संहिता में संशोधन का शासन को भेजा है।
राजस्व संहिता में इस आशय का बदलाव होने पर किसी निसंतान पुरुष या महिला
खातेदार की मृत्यु होने पर उसकी अविवाहित भतीजी या भांजी को संपत्ति में
उत्तराधिकार मिलने का रास्ता साफ हो सकेगा। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने
बताया कि पर विचार किया जा रहा है।
अविवाहित भतीजी या भांजी को भी मिल सकेगा संपत्ति में हिस्सा
राजस्व संहिता में संशोधन का इरादा, शासन को भेजा गया
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