प्रदेश के सभी 586 राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी माध्यम से भी पढ़ाई
होगी। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा संजय अग्रवाल ने इस संबंध में सभी
जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षक और संयुक्त शिक्षा निदेशकों से
सुझाव मांगा है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो आगामी शैक्षिक
सत्र 2018-19 से जीआईसी में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई-लिखाई शुरू कराई
जाएगी।सरकार की मंशा इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के अलग से सेक्शन शुरू
करने की है। विभाग की ओर से अफसरों से पूछा गया है कि क्या उनके जिले के
सभी राजकीय इंटर कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम अनुभाग प्रारंभ किया जा सकता
है। यदि नहीं तो उसके क्या कारण हैं और फिलहाल कितने कॉलेजों में अंग्रेजी
माध्यम से अनुभाग शुरू किया सकता है। जिन कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम
अनुभाग शुरू हो सकता है उनमें तैयारी के लिए निदेशालय या शासन स्तर से किस
प्रकार की आवश्यकता है।सूत्रों के अनुसार अफसरों से फीडबैक मिलने के बाद ही
इसकी प्रक्रिया शुरू होगी। यह कदम उन बच्चों को ध्यान में रखकर उठाया जा
रहा है जिनके पास अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मोटी फीस देने के लिए रुपये
नहीं है लेकिन वे अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई करना चाहते हैं। वैसे भी यूपी
बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए हिन्दी के साथ अंग्रेजी
में भी पेपर छपवाता है।
परिषदीय स्कूलों में तीन साल से अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई
परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई तीन साल से चल रही
है। पहले हर जिले में दो-दो स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई हो रही
थी। इस साल स्कूलों की संख्या बढ़ाई जा रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों से
हर ब्लाक से पांच-पांच स्कूलों की लिस्ट मांगी गई है।
विषयों की 31 किताबें एनसीईआरटी पैटर्न पर शुरू होगी
सरकार 2018-19 सत्र से यूपी बोर्ड के 26 हजार से अधिक स्कूलों में
एनसीईआरटी पर आधारित किताबें लागू करने जा रहा है। इस साल 18 विषयों की 31
किताबें एनसीईआरटी पैटर्न पर शुरू होगी जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो
चुकी है।
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