उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने प्रदेश भर के 896 शिक्षकों को परीक्षा संबंधी कार्यों से अयोग्य घोषित कर दिया है। इस निर्णय से शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और ईमानदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
क्यों की गई शिक्षकों पर कार्रवाई?
यूपी बोर्ड द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कुछ शिक्षक:
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परीक्षा नियमों का उल्लंघन कर चुके थे
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ड्यूटी में लापरवाही बरत रहे थे
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पहले भी अनुशासनहीनता के मामलों में शामिल रहे थे
इन्हीं कारणों से बोर्ड ने इन शिक्षकों को परीक्षा ड्यूटी, मूल्यांकन और प्रायोगिक परीक्षा कार्य से बाहर कर दिया है।
किन कार्यों से रहेंगे वंचित?
अयोग्य घोषित शिक्षक अब:
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बोर्ड परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक (Invigilator) नहीं बन सकेंगे
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उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे
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प्रायोगिक परीक्षाओं में परीक्षक की भूमिका नहीं निभा सकेंगे
कुछ मामलों में शिक्षकों पर आजीवन प्रतिबंध भी लगाया गया है।
किस क्षेत्र में कितने शिक्षक अयोग्य?
बोर्ड के अनुसार विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में अयोग्य शिक्षकों की संख्या इस प्रकार है:
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प्रयागराज क्षेत्र में सबसे अधिक
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वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर और बरेली क्षेत्र भी शामिल
यह दर्शाता है कि कार्रवाई केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में की गई है।
शिक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
इस सख्त कदम से:
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नकल और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी
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योग्य और ईमानदार शिक्षकों को अवसर मिलेगा
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छात्रों का बोर्ड परीक्षा पर विश्वास बढ़ेगा
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परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगी
यूपी बोर्ड का सख्त संदेश
यूपी बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि:
“परीक्षा व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।”
आने वाले वर्षों में भी यदि कोई शिक्षक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
यूपी बोर्ड का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2026 बोर्ड परीक्षा को निष्पक्ष बनाने के लिए उठाया गया यह कदम छात्रों, अभिभावकों और ईमानदार शिक्षकों — सभी के हित में है।