UPTET परीक्षा की देरी ने बदली हजारों अभ्यर्थियों की ज़िंदगी, करियर पर मंडरा रहा संकट

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) पिछले कई वर्षों से लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा सपना बनी हुई है। लेकिन परीक्षा की लगातार देरी और अनिश्चितता ने इस सपने को आज संघर्ष की कहानी में बदल दिया है। UPTET न सिर्फ एक परीक्षा है, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए सरकारी शिक्षक बनने का एकमात्र रास्ता भी है।

UPTET परीक्षा क्यों बन गई अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी परेशानी?

UPTET परीक्षा का आयोजन लंबे समय से नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से इसकी तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार परीक्षा तिथि टल जाती है। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास कमजोर हुआ है, बल्कि मानसिक और आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।

1. करियर ठहराव का शिकार युवा

कई उम्मीदवारों ने अपनी पूरी पढ़ाई और समय केवल UPTET की तैयारी में लगा दिया। न तो वे दूसरी नौकरी कर पाए और न ही किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की ओर ध्यान दे सके। परिणामस्वरूप आज वे करियर के ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहाँ आगे का रास्ता साफ नहीं दिखता।

2. ओवरएज होने का डर

UPTET की देरी से सबसे बड़ी चिंता उम्र सीमा को लेकर है। कई अभ्यर्थी अब ओवरएज होने की कगार पर हैं। अगर परीक्षा जल्द नहीं हुई तो वे शिक्षक बनने के योग्य ही नहीं रह जाएंगे।

3. आर्थिक और पारिवारिक दबाव

ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले उम्मीदवार वर्षों से बिना आय के तैयारी कर रहे हैं। परिवार का दबाव, समाज के सवाल और भविष्य की अनिश्चितता उन्हें मानसिक रूप से तोड़ रही है।

UPTET अभ्यर्थियों की भावनात्मक स्थिति

कई उम्मीदवारों का कहना है कि वे अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। वर्षों की मेहनत के बाद भी जब परीक्षा नहीं होती, तो निराशा बढ़ती है। कुछ छात्रों ने यह भी बताया कि बार-बार की देरी से उनमें डिप्रेशन और तनाव जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं।

सरकार और आयोग से अभ्यर्थियों की मांग

UPTET अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि:

  • परीक्षा कैलेंडर स्पष्ट रूप से जारी किया जाए

  • परीक्षा तिथियों में बार-बार बदलाव न हो

  • ओवरएज उम्मीदवारों को विशेष छूट दी जाए

  • भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए

क्या है आगे का रास्ता?

UPTET परीक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन अभ्यर्थियों की उम्मीद अब भी कायम है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मेहनत और संघर्ष को समझे और जल्द से जल्द परीक्षा आयोजित कराए, ताकि वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकें।

निष्कर्ष

UPTET परीक्षा की देरी केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह हजारों युवाओं के सपनों और जीवन से जुड़ा मुद्दा है। समय पर निर्णय और ठोस कदम ही इन युवाओं को निराशा से बाहर निकाल सकते हैं। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह एक पूरी पीढ़ी के करियर को प्रभावित कर सकता है।

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