रामपुर में फर्जी दस्तावेजों से शिक्षक बनी पाकिस्तानी नागरिक, 30 साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा

📰 रामपुर न्यूज़: फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने का बड़ा खुलासा

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। वर्ष 1992 में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्त हुई माहिरा उर्फ फरजाना के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार को मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी महिला के पाकिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई।

⚠️ पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर हासिल की सरकारी नौकरी

जानकारी के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आतिशबाज निवासी अख्तर अली की बेटी फरजाना ने 17 जून 1979 को पाकिस्तान निवासी सिबगत अली से निकाह किया था। निकाह के बाद वह पाकिस्तान चली गई और वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली। पाकिस्तान में उसने दो बेटियों फुरकाना और आलिमा को जन्म दिया।

बाद में तलाक होने के बाद फरजाना भारत लौट आई, लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत में रहना जारी रखा

📂 पहले भी दर्ज हो चुका है विदेशी अधिनियम का मुकदमा

एलआईयू (LIU) की रिपोर्ट पर वर्ष 1983 में फरजाना के खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। 25 जून 1985 को सीजेएम कोर्ट ने उसे मुकदमे की समाप्ति तक अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया था।

इसके बावजूद उसने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता की जानकारी छिपाकर 22 जनवरी 1992 को बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका की नौकरी हासिल कर ली और प्राथमिक विद्यालय कुम्हरिया कला में तैनात हो गई।

🏫 मामला उजागर होने पर हो चुकी है बर्खास्तगी

जब यह फर्जीवाड़ा सामने आया तो आरोपी शिक्षिका को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। हाल ही में शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में दोबारा रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश मिले थे।

खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार और सहायक कनिष्ठ अजीमनगर थाने पहुंचे और तहरीर दी। इसके आधार पर पुलिस ने मोहित सिंह की तहरीर पर माहिरा उर्फ फरजाना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

👮 पुलिस का बयान

एसपी विद्या सागर मिश्र ने बताया—

“शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत पत्र प्राप्त हुआ था। उसी के आधार पर अजीमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत जांच की जाएगी।”

🔍 जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि:

  • फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुए

  • किन अधिकारियों की भूमिका रही

  • कितने वर्षों तक सरकारी वेतन लिया गया

  • अन्य विभागीय लापरवाही कहां हुई


📌 निष्कर्ष

रामपुर का यह मामला न केवल सरकारी सिस्टम में गंभीर खामियों को उजागर करता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा भी माना जा रहा है। जांच के बाद और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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