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परिषदीय स्कूलों में खेल महोत्सव व वार्षिकोत्सव के लिए बजट बना मज़ाक, शिक्षक संघों ने जताई नाराज़गी

 संतकबीरनगर न्यूज़ | परिषदीय स्कूल | खेल महोत्सव | वार्षिकोत्सव बजट

संतकबीरनगर जिले के परिषदीय विद्यालयों में खेल महोत्सव और वार्षिकोत्सव के आयोजन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शासन द्वारा खेल महोत्सव के लिए 300 रुपये और वार्षिकोत्सव के लिए मात्र 1200 रुपये प्रति विद्यालय का बजट आवंटित किया गया है, जिसे शिक्षक संगठनों ने अव्यवहारिक और अपर्याप्त बताया है।

31 जनवरी तक आयोजन अनिवार्य

निदेशक, राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा जिले के सभी बीएसए को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विद्यालयों में 31 जनवरी तक खेल महोत्सव और वार्षिकोत्सव का आयोजन अनिवार्य रूप से किया जाए। इसके लिए बजट पहले ही जारी कर दिया गया है।

जिले में कितने स्कूलों को मिला बजट

  • जिले में कुल 1247 परिषदीय विद्यालय

  • 7 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय

  • परिषदीय विद्यालयों को 1200 रुपये प्रति स्कूल

  • कस्तूरबा गांधी विद्यालयों को भी 1200 रुपये प्रति विद्यालय

  • खेल महोत्सव हेतु कम्युनिटी मोबिलाइजेशन मद से 300 रुपये

किन खेल गतिविधियों का होगा आयोजन

  • कक्षा 3 से 5 : 50 व 100 मीटर दौड़

  • कक्षा 5 से 8 : 100 व 200 मीटर दौड़

  • सभी बच्चों के लिए रिले रेस

  • विजेता विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार

शिक्षक संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल

शिक्षक संघों का कहना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में इतनी कम धनराशि में खेल सामग्री, पुरस्कार, प्रमाणपत्र, मंच सज्जा, टेंट, कुर्सियां, दरी और जलपान जैसी व्यवस्थाएं करना असंभव है।

शिक्षक नेताओं की प्रतिक्रिया

नवीन त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

“वर्तमान समय में लागत लगातार बढ़ रही है। यह राशि केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। इसे बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है।”

अंबिका देवी यादव, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ

“तीन सौ रुपये में खेल सामग्री खरीदना संभव नहीं है। 1200 रुपये में वार्षिकोत्सव कराना व्यावहारिक नहीं है।”

केसी सिंह, कोषाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ

“राशि में शीघ्र वृद्धि होनी चाहिए, ताकि आयोजन गरिमा और उद्देश्य के अनुरूप हो सके।”

क्या केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा आयोजन?

शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि बजट में वृद्धि नहीं की गई, तो खेल महोत्सव और वार्षिकोत्सव केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएंगे, जिससे बच्चों की प्रतिभा और अभिभावकों की सहभागिता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए कार्यक्रम तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बजट के बिना ये योजनाएं ज़मीनी स्तर पर सफल नहीं हो सकतीं। शिक्षक संघों ने मांग की है कि शासन तत्काल इस पर पुनर्विचार करे।

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