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बीटीसी और शिक्षामित्र दोनों परीक्षा में बैठेंगे, जो पास होगा वो पायेगा नौकरी: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सरकार लेगी निर्णय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हटाये गये शिक्षामित्रों की समस्या पर प्रदेश सरकार ने सहानुभूति का परिचय देते हुए निर्णय लिया है यह कहना है सूबे के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा महेन्द्र सिंह
का। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों को मिलने वाले 25 अंकों का निर्धारण अभी नहीं हुआ है, बीटीसी के लोग कह रहे थे कि हम लोगों के बीच में किसी और की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सरकार निर्णय ले रही है। उस निर्णय के तहत एक कमेटी बनाई गयी है कमेटी अपना निर्णय लेगी। दोनों लोग परीक्षा में बैठेंगे, जो परीक्षा को पास करेगा, उसको नौकरी मिलेगी, इसलिए सरकार ने यह निर्णय लिया है।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर मंगलवार को जनसुनवाई केन्द्र में मौजूद डा सिंह ने कहा कि बीटीसी के अभ्यर्थियों को यह सोचना चाहिए कि कितना बड़ा निर्णय उनके पक्ष में हुआ है, सुप्रीम कोर्ट का आदेश हुआ है। शिक्षामित्र जो 10—15 वर्षो से पढ़ा रहे थे, उनको वहां से हटाया गया है, सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए सुप्रीमकोर्ट के मार्गदर्शन मेंए जिसने 15—20 वर्षों की सेवा की है उनको आयु सीमा में छूट दी जा रही है।
महेन्द्र सिंह ने बताया कि आज जन सहयोग केन्द्र पर लगभग 109 समस्याओं के शिकायती पत्र आयेए जिसमे लगभग 74 समस्याओं का निस्तारण किया गया। अधिकांश लोगों की समस्या लोगों के मकानों पर कब्जे को लेकर रहीं। भाजपा मीडिया प्रभारी हरीश चन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार) धरम सिंह सैनी जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए उपस्थित रहेंगे।

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