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शिक्षामित्रों का नियमितीकरण आखिर क्यों नहीं सम्भव ? आज का बड़ा खुलासा बड़ी बहस ???? : 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती Latest News

प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्रों को रखने की व्यवस्था सन 1999 से प्रारंभ हुई थी. सरकार ने यह व्यवस्था बेरोजगार युवकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने के कारण लागू की थी यह व्यवस्था.

सरकार ने गुजरात मॉडल के आधार पर यह व्यवस्था लागू की मात्र इसलिए क्योंकि सरकार के पास उस टाइम नहीं थे स्कूलों में प्रशिक्षित अध्यापक.
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तत्तकालीन सरकार ने प्रदेश में शिक्षामित्रों को एक निश्चित मासिक मानदेय पर मात्र 11 माह के लिए संविदा पर नियुक्ति दी थी.इस भर्ती में ग्राम समितियों और जिला समिति की ओर से स्थानीय स्तर पर किए गए युवकों के चयन में आरक्षण नियमों का पालन भी नहीं हुआ था. आरक्षण यह था कि जिस ग्रामसभा में जिस जाति के प्रधान हुए थे उसी जाति के युवक को शिक्षामित्र पद पर नियुक्त कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा कि यह बात स्पष्ट रूप से सभी शिक्षामित्रों को भी पता है कि उनकी नियुक्ति अस्थायी और संविदा की है अत: उनका नियमितीकरण या समायोजन संभव नहीं है।

लेकिन फिर भी प्रयास करने में क्या जाता है ? संघे शक्ति सर्वदा बात को ध्यान में रखकर काम करोगे तो हो सकता है सफलता मिल जाये. लेकिन गारन्टी नहीं है मित्रो.
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