शिक्षामित्र समायोजन केस का दुष्प्रभाव अवश्यसंभावी , 72825 भर्ती पर नयी सरकार का कोई प्रभाव या दुष्प्रभाव नहीं

नयी सरकार बीजेपी की!! वर्तमान भर्तियों पर पड़ने वाला प्रभाव :एक आंकलन।*
1. सर्वप्रथम अकादमिक भर्तियों पर पूर्व राज्य सरकार ने अकादमिक भर्ती को महत्व दिया है, लगभग एक लाख भर्तियों में अकादमिक मेरिट भर्ती हुई, लेकिन बीजेपी की नीति टेट को महत्त्व देने की रही है, अब तक
स्मृति ईरानी से प्रकाश जावड़ेकर तक सभी ने टेट परीक्षा को महत्त्व दिया है, ये बात वे बार बार कहते रहे हैं, सभी बीजेपी शाषित राज्यों में ये लागू है।
*अब ये देखना दिलचष्प होगा कि नयी सरकार क्या स्टैंड लेती है क्योंकि अकादमिक भर्तियां सुप्रीम कोर्ट के पहले पड़ाव पर हैं।*
2. शिक्षामित्र समायोजन केस पर एक नज़र:- पूर्व राज्य सरकार द्वारा शिक्षामित्रों को सर्वाधिक महत्त्व दिया गया ये किसी से छिपा नहीं है ऐसे में नयी सरकार पिछली सरकार के खिलाफ भी जा सकती है इससे इंकार नहीं किया जा सकता। सरकार बन जाने पर शिक्षामित्रों का कोई राजनितिक दवाब भी नहीं है। सांगठनिक रूप से शिक्षामित्र 3 बड़े गुटों में बंट चुके हैं जिन का एक होना लगभग असंभव है।
*स्पष्ट है, शिक्षामित्र समायोजन केस का दुष्प्रभाव देखने को मिलना अवश्यसंभावी है।* दूसरी तरफ 32000 असमायोजितों पर इसका बहुत बुरा असर ये पड़ेगा कि नई शिक्षा नीति असमायोजितों को कभी समायोजित नहीं होने देगी।
ये आशंका निराधार नहीं बल्कि बीजेपी घोषणा पत्र में भी स्पष्ट रूप से लिखित हैं, *घोषणा पत्रानुसार कोर्ट का फैसला आने के बाद नयी सरकार आप के रोज़गार की व्यवस्था करेगी।* और नयी शिक्षा नीति में इस की व्यवस्था पहले से नियत मानदेय के रूप में स्थापित है। जैसा कि झारखंड राज्य में किया गया है।
3. 72825 भर्ती चुकी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है इस लिए इस भर्ती पर नयी सरकार का कोई प्रभाव या दुष्प्रभाव नहीं पड़ने वाला।
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