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शिक्षा मित्र विवाद : क्या है पूरा मामला

शिक्षा मित्र विवाद : क्या है पूरा मामला
25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।
समायोजन रद्द होने के बाद से ही शिक्षामित्र संशोधित अध्यादेश लाकर पुनः सहायक शिक्षक बनाने व प्रक्रिया पूर्ण होने तक समान कार्य समान वेतन देने की मांग करते हुए जिला स्तर पर आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच कई दौर से वार्ता के बाद भी कोई हल ना निकलता देख शिक्षामित्रों ने 21अगस्त को गोमती तट पर प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन का ऐलान कर दिया था।

आंदोलन के पहले दिन शासन प्रशासन ने कई बार मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह से वार्ता कराने का प्रस्ताव रखा। किंतु शिक्षामित्र मुख्यमंत्री से वार्ता करने पर ही अडिग रहे। 21 अगस्त की देर शाम अपर मुख्य सचिव ने शिक्षामित्रों के मूल पर प्रभाव से 10000 मानदेय देने, शिक्षामित्र कार्यालय का प्रति सत्र 2.5 अधिकतम 25 अंक भारांश देने और 15 अक्टूबर 2017 को शिक्षक पद पात्रता परीक्षा टीईटी परीक्षा आयोजित कराने का आदेश जारी कर दिया। जिसमें शिक्षामित्रों की खासा रोष बढ़ गया था।
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