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मानदेय मिला न मूल विद्यालय में हुई वापसी

बहराइच : समायोजन रद्द होने के बाद से शिक्षामित्र दोहरी मार झेल रहे है। शिक्षा मित्रों की मूल विद्यालयों में न तो वापसी हो सकी है और न ही पांच माह से मानदेय भी खाते में आया है। शिक्षामित्र विभाग का चक्कर काट रहे हैं। अधिकारी कभी खाते में पैसा भेज दिया गया है तो कभी कहते हैं कि ग्रांट उपलब्ध है भेज दिया जाएगा।


जिले के 2576 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजन किया गया था। समायोजन के दौरान इन्हें मूल विद्यालय से 60 से 80 किमी दूर स्थित स्कूलों में तैनाती दी गई। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने सहायक अध्यापक पद पर हुए समायोजन को रदद कर दिया। निर्णय के बाद शिक्षामित्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर दस हजार रूपये करने की घोषणा कर दी। पांच माह से शिक्षामित्र समायोजन रदद होने के बाद मूल विद्यालयों में वापसी के साथ मानदेय का इंतजार कर रहे है। समायोजन के बाद शिक्षामित्र रामतेज को चित्तौरा से बलहा ब्लॉक, प्रदीप पांडेय को तेजवापुर ब्लॉक से फखरपुर, मुबारक को चित्तौरा से महसी ब्लॉक, रिजवान व अनवर को चित्तौरा से शिवपुर ब्लॉक व सुरेश को नवाबगंज से फखरपुर ब्लॉक तथा रवि जायसवाल को चित्तौरा से जरवल ब्लॉक के स्कूलों में तैनात किया गया। समायोजन खत्म होने के पांच माह बाद भी समायोजित शिक्षामित्रों की मूल विद्यालयों में वापस नहीं भेजा गया है। मानेदय के लिए भी विभाग का चक्कर लगा रहे है। बीएसए डॉ. अमरकांत ¨सह ने बताया कि शिक्षामित्रों का मानदेय पहले ही आ चुका है। खातों में भेज दिया गया है। किन कारणों से मानदेय नहीं मिला है। इसकी जांच करवाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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