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टीईटी- 2017 की बहस में महाधिवक्ता के तर्को से सहमत नहीं हुआ हाई कोर्ट

लखनऊ : राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)- 2017 के चौदह प्रश्नों के मामले में महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि टीईटी में असफल अभ्यर्थियों को परिणाम को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
कहा कि एनसीटीई के दिशानिर्देश बाध्यकारी नहीं हैं और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा को टाला नही जा सकता।
कोर्ट ने महाधिवक्ता के तर्को से सहमति नहीं जताई और कहा कि टीईटी में ऐसे लाखों शिक्षामित्र शामिल हुए थे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से झटका मिला था। वे टीईटी पास कर नियमित शिक्षक बनने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे भी अभ्यर्थी थे जिन्होंने बीटीसी पास कर रखी थी और कुछ शिक्षा मित्र के रूप में भी काम कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में यह परीक्षा काफी महत्वपूर्ण थी। जब परीक्षा में गड़बड़ी साफ दिख रही है तो याचिकाओं में दखल न देना उचित प्रतीत नहीं होता है। अपने आदेश में कोर्ट ने तारीखवार ब्योरा भी लिखाया कि किस प्रकार सरकार की ओर से इस मामले में शीघ्र सुनवाई में अड़चन डाली गई। कोर्ट ने परीक्षा नियंत्रक प्राधिकरण की सचिव डॉ. सुक्ता सिंह के जवाबी हलफनामा का जिक्र करते हुए कहा कि उक्त जवाब में कहा गया है कि पेपर सेट करने की जिम्मेदारी पेपर सेटर्स की होती है।

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