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शिक्षा मित्रों को झटका, योगी सरकार नहीं बढ़ाएगी मानदेय

लखनऊ. मानदेय बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षा मित्रों के लिए बड़ा झटका है। दरअसल योगी सरकार की बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री  अनुपमा जायसवाल ने बताया कि कहाहै कि प्रत्येक शिक्षामित्र को हर माह 10 हजार
रुपये मानदेय मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मानदेय में और वृद्धि करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। शिक्षामित्रों के वेतन के लिए 22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 9 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने जौनपुर में शिक्षामित्रों को वेतन न मिलने की जांच कराने का आश्वासन दिया।
अनुपमा जायसवाल ने दिया बयान
अनुपमा जायसवाल के इस बयान से शिक्षा मित्रों की उम्मीदों पर पानी फिरा है। शिक्षामित्रों से जुड़े एक सवाल पर अनुपमा ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग से 17 हजार और सर्व शिक्षा अभियान से 1.52 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं। शिक्षामित्र मानदेय के आधार पर कार्य कर रहे हैं इसलिए सहायक अध्यापकों की तरह सुविधाएं नहीं दी जा सकती। सपा के पारसनाथ यादव ने कहा कि जौनपुर में 85 शिक्षामित्रों को मानदेय नहीं मिल रहा है। इस पर बेसिक शिक्षामंत्री ने इसकी जांच कराने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अधिनियम बनाकर शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाए जाने का विचार नहीं है।
बसपा का आरोप
बसपा से असलम राइनी ने बेसिक शिक्षामंत्री पर स्कूलों में बच्चों को पुस्तकें, ड्रेस, जूता वितरित करने में निजी आरोप लगाए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने इसे कार्यवाही में शामिल न करने के निर्देश दिए। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि जिस समय यूनिफार्म नियत रेट पर वितरित की गई हैं। उस समय ई-टेंडर की व्यवस्था नहीं थी। पारदर्शी तरीके से खुली निविदा के जरिये टेंडर किए गए।
पिछले दिनों हाईकोर्ट ने दिया था आदेश

बीते माह हाईकोर्ट ने 16,848 गणित-विज्ञान के सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित शिक्षामित्रों को बड़ी राहत दी थी। शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द होने के बाद कोर्ट ने उनको गणित-विज्ञान के सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त पदों पर नियुक्ति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई वैधानिक बाधा है तो संबंधित अधिकारी अभ्यर्थी का पक्ष सुनकर सकारण आदेश पारित करें। बलिया के नूर हसन मंसूरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया।

याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची की आरंभिक नियुक्ति शिक्षामित्र के पद पर हुई थी। इसके बाद पर सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित कर लिया गया। इसी बीच 16448 सहायक अध्यापक पद के लिए विज्ञापन जारी हुआ। याची टीईटी उत्तीर्ण होने और अन्य अर्हताएं रखने के लिए कारण उक्त चयन में शामिल हुआ और चयनित कर लिया। मगर इस दौरान चयन प्रक्रिया को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन था इसलिए याची ने 16448 सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्ति नहीं ली।
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