केस-1-पूर्व माध्यमिक विद्यालय में गौरा मोहनलालगंज में विज्ञान/गणित के
पद पर तैनात सहायक अध्यापक सर्वेश कुमार 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। बावजूद
इसके उनका तबादला पूर्व माध्यमिक विद्यालय मऊ में सामान्य (भाषा) पद पर कर
दिया गया। यह विद्यालय भी मेन रोड से काफी अंदर है।
केस-2-प्राथमिक
विद्यालय अनौरा में तैनात सहायक अध्यापिका परमजीत कौर के पैर पोलियो से
ग्रस्त हैं। इसके बाद भी उनका तबादला प्राथमिक विद्यालय गढ़ी चुनौटी प्रथम
बंथरा में कर दिया गया। उनकी मानें तो यह विद्यालय भी 18 किलोमीटर दूर है।
परमजीत ने बताया कि उनकी छोटी बच्ची का अभी ऑपरेशन करवाया है। बिना किसी
जानकारी के ही उनका समायोजन कर दिया गया।
केस-3- रागिनी पांडेय
गोरखपुर के परिषदीय विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थीं। एक
महीने पहले ही इन्हें बीकेटी स्थित महिगवां प्राथमिक विद्यालय में
स्थानांतरित किया गया। अब इन्हें दोबारा माल स्थित परिषदीय विद्यालय में
समायोजित कर दिया गया। यह विद्यालय भी करीब 25 किलोमीटर दूर है। रागिनी ने
बताया कि बीच सत्र में उन्होंने बच्ची का स्कूल में दाखिला करवाया और किराए
पर कमरा भी लिया। अब सबकुछ अव्यवस्थित हो गया है।
एनबीटी, लखनऊ : ये
चंद उदाहरण जिले के परिषदीय विद्यालयों में हुए शिक्षकों के समायोजन एवं
स्थानांतरण की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त
हैं। जिन शिक्षकों को दूसरे जिलों से स्थानांतरण किया गया था, उनका भी एक
महीने के अंदर ही फिर से समायोजन कर नया विद्यालय दे दिया गया। वहीं, कई
दिव्यांग शिक्षकों को भी कई किलोमीटर दूर स्थित विद्यालयों में समायोजित कर
दिया गया। इन शिक्षकों जब विद्यालय जॉइन करने का ऑर्डर मिला तब पता चला।
इस पर शुक्रवार को दर्जनों शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंचे और आपत्ति दर्ज
करवाई।
बीएसए ने कुछ दिन पहले ही शिक्षकों के समायोजन और स्थानांतरण
की प्रक्रिया पूरी की थी। उसके बाद जैसे-जैसे शिक्षकों को आदेश मिलने लगे,
गड़बड़ियां सामने आने लगीं। इन शिक्षकों की तैनाती के बाद ही एक महीने के
अंदर ही दूसरे विद्यालयों में समायोजित कर दिया गया, जो कि नियम विरुद्ध
है। इसके अलावा कई दिव्यांग शिक्षकों का भी दूर वाले विद्यालयों में
स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि इन शिक्षकों से आपत्ति तक नहीं मांगी गई।
इन सभी शिक्षकों में विभाग की इस कार्रवाई के खिलाफ गुस्सा व्याप्त है।
आपत्तियां तक नहीं मांगी गईं
प्राथमिक
शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का
कहना है कि समायोजन में जो प्रक्रिया अपनाई गई वो नियमानुसार नहीं है। पहले
आपत्तियां ली जानी चाहिए थी। फिर काउंसलिंग करवाई जाती। समायोजन से पहले
अपने-अपने ब्लॉक में जगह दी जाती है, लेकिन यहां पर एक ब्लॉक के शिक्षक को
दूसरे ब्लॉक में तैनात कर दिया गया। इनसे आपत्तियां तक नहीं मांगी गईं।
इससे कई विद्यालय तो एकल हो गए। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला
मंत्री वीरेंद्र सिंह ने भी नियम विरुद्ध समायोजन को निरस्त करने की मांग
करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
बीएसए कार्यालय पहुंच कर जताई आपत्ति
गलत
तरीके से हुए समायोजन से नाराज दर्जनों शिक्षक शुक्रवार को दोपहर में
बीएसए कार्यालय पहुंच गए। वह बीएसएस डॉ. अमर कांत सिंह से मिलने का इंतजार
कर रहे थे। तभी शाम को जैसे ही बीएसए अपने कार्यालय पहुंचे। मौका पाकर सभी
शिक्षकों ने उन्हें घेर लिया तो वे कुछ ही देर में चले गए।
यदि किसी शिक्षक का स्थानांतरण गलत हुआ है तो वे अपना प्रत्यावेदन दे सकते हैं। उस पर विचार किया जाएगा।
-डॉ अमर कांत सिंह, बीएसए लखनऊ
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