रेलवे अगले पांच साल में 150 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजना बना रही है, इससे 10 लाख अतिरिक्त रोजगार पैदा होंगे। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को यह जानकारी दी। अगस्त में रेल मंत्रलय की जिम्मेदारी संभालने वाले गोयल ने कहा कि वह रेलवे को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके लिए अगले पांच साल में रेलवे अकेले करीब एक हजार अरब रुपये से अधिक निवेश करेगी और यह रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र रहेगा। गोयल ने एक समारोह में कहा कि रेलवे सरकार के सुरक्षित और आरामदायक यात्र के एजेंडे को आक्रमक तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए बुनियादी ढांचे पर जोर के साथ घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) केा बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। गौरतलब है कि गोयल से पहले रेल मंत्री रहे सुरेश प्रभु ने रेलवे में पांच साल में 8.5 लाख करोड़ रुपये निवेश की आवश्यकता बताई थी और इसके लिए घरेलू और विदेशी निवेश का खाका तैयार किया था। प्रभु ने एलआईसी से 1.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज का जुगाड़ भी कर लिया था, जिससे कई अहम परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पीयूष गोयल ने जो एक हजार अरब रुपये की बात कही है, वह प्रभु की योजना से अलग है या नहीं।
चार साल में पूर्ण विद्युतीकरणगोयल ने कहा कि उनका मंत्रलय रेल लाइन के पूर्ण रूप से विद्युतीकरण के काम को चार साल में ही पूरा करने पर ध्यान दे रही है। जबकि पूर्व योजना के मुताबिक इसे 10 साल में पूरा किया जाना था। इससे घाटे में चल रही रेलवे को अपनी लागत में करीब 30 प्रतिशत कमी लाने में मदद मिलेगी। विद्युतीकरण पहल से रेलवे को ईंधन बिल में सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये की बचत में मदद मिलेगी।
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नई दिल्ली एजेंसियांदेश में नौकरियों में पर्याप्त संख्या में वृद्धि नहीं होने का कारण बड़े पैमाने पर पूंजी गहन प्रौद्योगिकी का उपयोग और उपयुक्त कौशल का अभाव है। नीति आयोग के तहत आने वाले एक प्रमुख शोध एवं शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान ने यह कहा है।राष्ट्रीय श्रम अर्थशा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (एनआईएलईआरडी) का यह भी कहना है कि नौकरियों में वृद्धि धीमी जरूर है लेकिन रोजगार विहीन वृद्धि की बात सही नहीं है। यह बात ऐसे समय कही गई है जब देश में पर्याप्त संख्या में रोजगार सृजन नहीं होने को लेकर विपक्ष के साथ सत्तारूढ़ दल भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा समेत अन्य सरकार की आलोचना कर रहे हैं। पूर्व में एप्लाइड मैनपावर रिसर्च के नाम से चर्चित संस्थान का कहना है कि कौशल विकास, श्रम गहन इकाइयों को प्रोत्साहन, घरेलू श्रम बाजार की स्थिति के हिसाब से अनुकूल प्रौद्योगिकी के विकास से पर्याप्त संख्या में रोजगार सृजित की जा सकती है।
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इसके लिए अगले पांच साल में रेलवे अकेले करीब एक हजार अरब रुपये से अधिक निवेश करेगी और यह रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र रहेगा। गोयल ने एक समारोह में कहा कि रेलवे सरकार के सुरक्षित और आरामदायक यात्र के एजेंडे को आक्रमक तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए बुनियादी ढांचे पर जोर के साथ घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) केा बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। गौरतलब है कि गोयल से पहले रेल मंत्री रहे सुरेश प्रभु ने रेलवे में पांच साल में 8.5 लाख करोड़ रुपये निवेश की आवश्यकता बताई थी और इसके लिए घरेलू और विदेशी निवेश का खाका तैयार किया था। प्रभु ने एलआईसी से 1.5 लाख करोड़ रुपये कर्ज का जुगाड़ भी कर लिया था, जिससे कई अहम परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पीयूष गोयल ने जो एक हजार अरब रुपये की बात कही है, वह प्रभु की योजना से अलग है या नहीं।
चार साल में पूर्ण विद्युतीकरणगोयल ने कहा कि उनका मंत्रलय रेल लाइन के पूर्ण रूप से विद्युतीकरण के काम को चार साल में ही पूरा करने पर ध्यान दे रही है। जबकि पूर्व योजना के मुताबिक इसे 10 साल में पूरा किया जाना था। इससे घाटे में चल रही रेलवे को अपनी लागत में करीब 30 प्रतिशत कमी लाने में मदद मिलेगी। विद्युतीकरण पहल से रेलवे को ईंधन बिल में सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये की बचत में मदद मिलेगी।
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