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बीएड फर्जीवाड़े में एक भी शिक्षक चिह्नित नहीं कर पाए अधिकारी

 LUCKNOW: डॉ। बीआर अंबेडकर आगरा यूनिवर्सिटी की फर्जी बीएड डिग्री हासिल कर नौकरी कर रहे 4570 शिक्षकों को चिन्हित करने के लिए शासन ने एडी बेसिक और बीएसए को 27 अक्टूबर तक का समय दिया था, लेकिन विभाग एक भी शिक्षक को चिन्हित करने में नाकाम रहा।
इस पर शासन ने नाराजगी जताते हुए 30 अक्टूबर तक का समय दिया है.

लापरवाही पर सचिव नाराज

एसआईटी की जांच में सामने आए इन शिक्षकों के नामों की एक सीडी बेसिक शिक्षा सचिव ने मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक और बीएसए को 12 अक्टूबर को भेजी थी। इसमें इन्हें चिन्हित कर कार्रवाई करके 27 अक्टूबर तक बेसिक शिक्षा सचिव को अवगत कराना था, लेकिन विभाग की ओर से एक भी शिक्षक को चिन्हित नहीं किया गया। लापरवाही पर सचिव ने नाराजगी जताते हुए 30 अक्टूबर तक फर्जी शिक्षकों को चिन्हित कर उनकी लिस्ट उपलब्ध कराने और 10 नवंबर तक उन पर विधिक और विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

शासन की सख्ती से काम शुरू

शासन की सख्ती पर बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर सीडी में दिये गए नाम- पतों के आधार पर फर्जी डिग्री धारक शिक्षकों की पहचान करने में जुटे रहे। खुद बीएसए और एबीएसए कमान संभाले हुए हैं। जांच में सैकड़ों की तादाद में फर्जी डिग्री धारक शिक्षक पकड़ में आ सकते हैं। इसमें कई शिक्षक नेता और उनके रिश्तेदारों के नाम भी शामिल हो सकते हैं। एडी बेसिक गिरजेश चौधरी ने बताया कि सीडी में दर्ज रिकॉर्ड का शिक्षकों के रिकॉर्ड से मिलान कराया जा रहा है।

अरेस्ट हुए चारों कर्मचारी सस्पेंड

बीएड फर्जी डिग्री मामले में एसआइटी द्वारा अरेस्ट कर जेल भेजे गए चारों कर्मचारियों को शनिवार को कुलपति ने सस्पेंड कर दिया। बीएड के सत्र 2005 फर्जीवाडे़ और फर्जी सत्यापन के मामले में एसआईटी ने 24 अक्टूबर को चार्ट रूम के सतेंद्र पाल, चार्ट रूम में रहे लक्ष्मण यादव, डिग्री अधीक्षक स्वामी सरन, डिस्पैच के साकेत कुमार को अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। कुलपति डॉ। अरविंद दीक्षित ने चारों कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग में भी फर्जी डिग्री से नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के नामों को लेकर हड़कंप की स्थिति है। पूर्व में एसआईटी द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के नामों की सूची भेजी जा चुकी है। वहीं शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर हुए समायोजन में सत्यापन में 41 शिक्षामित्रों के प्रमाण पत्र फर्जी मिले थे। इन सभी के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए गए थे, लेकिन एफआईआर नहीं हुई.
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