प्रयागराज : यूपी बोर्ड के ही अशासकीय माध्यमिक कालेजों में बड़े पैमाने
पर पद रिक्त नहीं है, बल्कि माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कालेजों की
हालत और खराब है। इन कालेजों में करीब दो हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली
चल रहे हैं। इन कालेजों को शिक्षक कब तक मिलेंगे? जवाब कोई भी देने की
स्थिति में नहीं है, क्योंकि अब तक इन कालेजों में नियुक्ति की प्रक्रिया
शुरू नहीं है।
प्रदेश सरकार सभी शिक्षकों का चयन लिखित परीक्षा के जरिए कराने को तत्पर
है। इसी को ध्यान में रखकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक
कालेजों में रिक्त पदों पर चयन के लिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र
को अधिकृत किया है। इसका शासनादेश कई माह पहले जारी हो चुका है, इसमें यह
भी निर्देश दिया गया कि यदि चयन बोर्ड इन नियुक्तियों में नियमावली आदि में
संशोधन चाहता है तो उसका प्रस्ताव भेजे। इसी के साथ संस्कृत कालेजों में
रिक्त पदों का ब्योरा जिला विद्यालय निरीक्षकों व मंडलीय संयुक्त शिक्षा
निदेशकों से मांगा गया। शिक्षा निदेशालय को सूबे के 973 कालेजों में मिले
ब्योरे में 2054 पद रिक्त मिले हैं। इनमें 604 पद प्रधानाचार्यो के हैं।
स्पष्ट है कि दो तिहाई कालेजों में प्रधानाचार्य ही नहीं है। इसमें
माध्यमिक व महाविद्यालय भी शामिल हैं। हालांकि महाविद्यालयों की संख्या
गिनी-चुनी है। उप निदेशक संस्कृत प्रमोद कुमार ने बताया कि जिले में रिक्त
पदों का अधियाचन चयन बोर्ड को नियमानुसार प्रक्रिया के तहत भेजे।
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