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सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरी में चयन के मामले में दिया अहम फैसला, नौकरी के चयन में मेरिट की अनदेखी संविधान का उल्लंघन

 नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरी में चयन के मामले में दिए गए एक अहम फैसले में कहा है कि चयन का आधार मेरिट ही होना चाहिए। मेरिट में नीचे स्थान वालों की नियुक्त करना और ऊंचा स्थान पाने वालों की अनदेखी करना संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर) में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है।



कोर्ट ने झारखंड में 2008 की पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती मामले में झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए अपने आदेश में यह टिप्पणी की। मामले में सारा विवाद 2008 की पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती में पहली चयन सूची और नियुक्ति में अनियमितताएं पाए जाने के बाद नए सिरे से मेरिट के आधार पर तैयार की गई दूसरी चयन सूची और नियुक्तियों से उपजा था। मेरिट के आधार पर बनाई गई दूसरी सूची और नियुक्तियों के बाद पहली सूची के आधार पर नियुक्त हुए कम मेरिट वाले 42 को नौकरी से निकाल दिया गया और ऊंची मेरिट के 43 अन्य को शामिल कर लिया गया। निकाले गए लोग न सिर्फ ट्रेनिंग कर चुके थे बल्कि अच्छे खासे समय तक नौकरी भी कर चुके थे।

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