इलाहाबाद।बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में किए गए 22 वें संशोधन को भी हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई है। नियमावली में हुए 20वें संशोधन का मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है। अनिल कुमार वर्मा और अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सहायक अध्यापकों की भर्ती हेतु टीईटी के अलावा एक और लिखित परीक्षा कराना अवैधानिक और औचित्यहीन है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने इस मामले को नौ अप्रैल को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।याची के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक 20 वें और 22 वें संशोधनों से केंद्रीय अधिनियमों का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना है कि नियमावली में किया गया संशोधन सुप्रीमकोर्ट के 25 जुलाई 2017 के आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीमकोर्ट ने शिक्षा मित्रों को दो अवसर देने का आदेश दिया है। इसलिए इन दो भर्तियों को पूर्व की नियमावली के तहत ही कराना होगा। इसके बाद ही कोई नया नियम लागू किया जा सकता है।अधिवक्ता का कहना है कि संशोधन सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद लाया गया है इसलिए इसका भूतलक्षी प्रभाव नहीं हो सकता है। मौजूदा समय में एक लाख 37 हजार भर्तियां रिकार्ड पर स्वीकृत हैं जबकि अर्हताधारी दावेदारों की संख्या इससे काफी कम है। इसलिए लिखित परीक्षा कराने का कोई आधार या औचित्य नहीं है। मामले की सुनवाई नौ अप्रैल को होगी।
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बेसिक शिक्षा नियमावली के 22वें संसोधन को चुनौती, 68500 शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों की नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग
बेसिक शिक्षा नियमावली के 22वें संसोधन को चुनौती, 68500 शिक्षक भर्ती
में शिक्षामित्रों की नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त
करने की मांग
इलाहाबाद।बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में किए गए 22 वें संशोधन को भी हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई है। नियमावली में हुए 20वें संशोधन का मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है। अनिल कुमार वर्मा और अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सहायक अध्यापकों की भर्ती हेतु टीईटी के अलावा एक और लिखित परीक्षा कराना अवैधानिक और औचित्यहीन है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने इस मामले को नौ अप्रैल को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।याची के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक 20 वें और 22 वें संशोधनों से केंद्रीय अधिनियमों का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना है कि नियमावली में किया गया संशोधन सुप्रीमकोर्ट के 25 जुलाई 2017 के आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीमकोर्ट ने शिक्षा मित्रों को दो अवसर देने का आदेश दिया है। इसलिए इन दो भर्तियों को पूर्व की नियमावली के तहत ही कराना होगा। इसके बाद ही कोई नया नियम लागू किया जा सकता है।अधिवक्ता का कहना है कि संशोधन सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद लाया गया है इसलिए इसका भूतलक्षी प्रभाव नहीं हो सकता है। मौजूदा समय में एक लाख 37 हजार भर्तियां रिकार्ड पर स्वीकृत हैं जबकि अर्हताधारी दावेदारों की संख्या इससे काफी कम है। इसलिए लिखित परीक्षा कराने का कोई आधार या औचित्य नहीं है। मामले की सुनवाई नौ अप्रैल को होगी।
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इलाहाबाद।बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली में किए गए 22 वें संशोधन को भी हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई है। नियमावली में हुए 20वें संशोधन का मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है। अनिल कुमार वर्मा और अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सहायक अध्यापकों की भर्ती हेतु टीईटी के अलावा एक और लिखित परीक्षा कराना अवैधानिक और औचित्यहीन है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने इस मामले को नौ अप्रैल को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।याची के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक 20 वें और 22 वें संशोधनों से केंद्रीय अधिनियमों का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना है कि नियमावली में किया गया संशोधन सुप्रीमकोर्ट के 25 जुलाई 2017 के आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीमकोर्ट ने शिक्षा मित्रों को दो अवसर देने का आदेश दिया है। इसलिए इन दो भर्तियों को पूर्व की नियमावली के तहत ही कराना होगा। इसके बाद ही कोई नया नियम लागू किया जा सकता है।अधिवक्ता का कहना है कि संशोधन सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद लाया गया है इसलिए इसका भूतलक्षी प्रभाव नहीं हो सकता है। मौजूदा समय में एक लाख 37 हजार भर्तियां रिकार्ड पर स्वीकृत हैं जबकि अर्हताधारी दावेदारों की संख्या इससे काफी कम है। इसलिए लिखित परीक्षा कराने का कोई आधार या औचित्य नहीं है। मामले की सुनवाई नौ अप्रैल को होगी।
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