मयंक तिवारी : "ज्यादा जोगी मठ उजाड़" कुछ ऐसी ही कहानी है #BEd TET 2011 की

"ज्यादा जोगी मठ उजाड़" कुछ ऐसी ही कहानी है #BEdTET2011 की। आज मुझे यह कहते हुए बिलकुल संकोच नही होगा कि सकारात्मक सरकार का लाभ टेट मोर्चा नही ले पा रहा है।
13नवम्बर2011 को मायावती सरकार में पहली बार हुई अध्यापक पात्रता परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों का संघर्ष माया सरकार से ही प्रारम्भ हो गया। अखिलेश सरकार तो पूरी तरह बीएड टेट के विरुद्ध थी ही इसलिए वहाँ संघर्ष करना मजबूरी था किन्तु यह बात निश्चित रूप से विचारणीय है कि पूरे 5वर्ष के शासनकाल में जितनी बार अखिलेश ने बीएड टेट की बात नही सुनी होगी उतने से ज्यादा बार मुलाकात मुख्यमंत्री योगी जी, डॉ दिनेश शर्मा जी, केशव प्रसाद मौर्य जी, प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय जी और सभी बड़े विभागीय अधिकारी केबल 1वर्ष में आपसे कर चुके है और सरकार का रुख भी नकारात्मक नही है फिर भी हम रास्ता निकलवा पाने में सफ़ल नही हो पाए है।
इन सबका कारण सिर्फ एक है कि हम सफलता और असफलता के बीच की पैनी धार पर खड़े होने के बाबजूद भी सिर्फ और सिर्फ मेरी-तेरी, इसकी-उसकी, ऐसा लाभ-वैसा लाभ, याची-गुणांकधारी आदि पर ना खुद एकजुट है ना ही शासन के समक्ष एक विषय ही रख रहे है आज ये विषय होता है तो कल दूसरा विषय होता है।
जबकि अंतिम आदेश आने के बाद हमारी तरफ से योगी सरकार को सिर्फ इतना ही बताना था कि हमने इतना लम्बा संघर्ष किया है जिसको आपने स्वयं देखा भी है और हमसे वादा भी किया है। हमारे लिए कई आदेश भी हुए यदि पूर्व सरकार चाहती तो किसी भी आदेश के अनुपालन में हमें नियुक्ति दे सकती थी लेकिन सपा सरकार की विरोध की राजनीति के चलने हम अपने अधिकार से वंचित रहे। अब आप ही कोई मार्ग निकालिए जिससे हमारा 7वर्ष लम्बा मैराथन संघर्ष अब समाप्त हो।
इतने सब के बीच हम कहाँ खड़े है वर्तमान सभी नेतृत्व अवश्य विचार करें और एक सलाह भी अवश्य दूँगा कि आप उस दिशा में कार्य करें जहाँ से अधिकतम बेहतर परिणाम की संभावना हो नाकि उस दिशा में जिधर चलने को भीड़ कहे। आपको अधिक लाइक और सकारात्मक कमेंट देखने को तो मिल जाएंगे किन्तु परिणाम नही।धन्यबाद
आपका मयंक तिवारी

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