25 जुलाई 2017 को समायोजन रद्द होने के बाद पुन: एक बार फिर से यूपी के शिक्षामित्रों ने अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. लेकिन अभी मात्र शिक्षामित्रों ने चार दिन के लिए लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में आये हैं.
शिक्षामित्रों का कहना है कि अगर मांगें पूरी न किन तो वे बड़ा कदम उठा सकते हैं. उनका कहना है कि 25 जुलाई २०१७ को समायोजन रद्द होने के बाद से उनका जीवन भविष्य बर्बाद हो गया है. उनकी मांग है कि सरकार प्रदेश के सभी शिक्षामित्रों को पैराटीचर के पद पर नियुक्त कर उनको समान कार्य समान वेतन दे.
शिक्षामित्रों के अनुसार समायोजन रद्द होने से अब तक 500 से अधिक शिक्षामित्रों साथीयों ने मौत को गले लगाया है. उन सभी शिक्षामित्रों के परिवारों को सीएम द्वारा आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए. उनका का कहना है कि जब शिक्षामित्र 10 हजार के मानदेय पर पढ़ाता है तो योग्य और वहीं 40 हजार के वेतन मिलता है तो वह अयोग्य कहलाता है.सरकार उनके साथ खेल रही है दोहरी नीति, जो अब नहीं चलेगा.
शिक्षामित्रों ने उनका समायोजन रद्द होना पूरी तरह से राजनीती से ओतप्रोत है. सपा ने नियुक्ति दी तो दूसरे ने भाजपा ने उनका समायोजन रद्द कर दिया. 1 लाख 37 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद जीवन अंधकार में चला गया है. अत: सरकार जो जल्द निर्णय लेना होगा.
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