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बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों की तबादला सूची में गड़बड़ घोटाला

आज सोशल मीडिया पर ट्रांसफर की लिस्ट वायरल हो गयी। इसमें किसी दीक्षा सिंह (सिद्धार्थनगर जिला ) की जोइनिंग डेट 1916 दिखाई गयी, तो बहुत से ऐसे  हैं , जिनकी सर्विस 35 साल से भी अधिक है जबकि ट्रांसफर के आवेदन के वही लोग पात्र बताये जा रहे थे जिन्होंने पहली बार ट्रांसफर के लिए एप्लाई किया है।
लेकिन ऐसे 35 साल की सर्विस वाले लोगों के बारे में कहा जा रहा है की या तो ये फर्जी हैं , या फिर इन्होने पहले ट्रांसफर का लाभ लिया होगा |
इसलिए कई लोग जन्मतिथि/नियुक्ति तिथि गलत दर्शाने की करने की चर्चा कर रहे हैं |
डेटा वेरिफाइड नहीं है ये तो दीक्षा सिंह  जोइनिंग डेट 1916 देख कर पता चल रहा है , लेकिन गहराई से छान बीन की जाये तो फर्जी असाध्य रोग, एक बार पहले ही ट्रांसफर का लाभ लेने वाले और अन्य फर्जी दस्तावेजों वाले तमाम कैंडिडेट्स  मिलेंगे |

सबसे बड़ा घटनाक्रम ये हुआ की विशेष परिस्थिति ( पति पत्नी विभिन्न जिलों में कार्यरत एवं उत्तर प्रदेश शासकीय नीति - की पति पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हों का भी अनुसरण करने वाले केस ) वाले अभ्यर्थी पीछे रह गए , जिनके लिए यथा संभव एक जिले में पोस्टिंग की है इसके कोई विशेष अंक भी नहीं दिए गए ,
और सामान्य परिस्थिति के अभ्यर्थियों से पीछे धकेल दिया |
एक और जानकारी सामने आ रही है , की कई लोगों ने उन जिलों में भी एप्लाई किया है , जिन जिलों  अंतर्जनपदीय ट्रांसफर की रिक्ति शून्य है | उनका तर्क है की उन जिलों से जब ट्रांसफर होंगे , तो फिर उनको मौका मिल जाएगा | लेकिन ऐसा है तो यह कई अभ्यर्थियों के साथ धोखा है , क्योंकि वे जीरो रिक्ति में एप्लाई नहीं कर सके |
या तो कई चरणों में इस ट्रांसफर पद्दति को पूरा किया जाता , की अगले चरण ट्रांसफर से सीट खाली होने पर दोबारा से आवेदन लिए जाते | इसके अलावा रिटायरमेंट के बाद रिक्तियों की संख्या भी बड़ी होंगी |
लिस्ट में ये भी देखा गया की कई हेड मास्टर (यु पी एस ) ने भी ट्रांसफर के लिए एप्लाई किया है |
असाध्य रोग वाले केसेस काफी बढ़ चढ़कर , लगभग 2000  हैं  और गड़बड़ी की  शंका जताई जा रही है , असाध्य रोग वाले केसेस में पति पत्नी या फिर बच्चे को शामिल किया जाना था , लेकिन लोगों में चर्चा है की इन लॉस (सास ससुर माता पिता ) को दिखा कर कुछ लोग गड़बड़ी कर रहे होंगे और ये सही केसेस नहीं होंगे।
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