वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राज प्रताप सिंह का वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) यूपी सरकार ने मंजूर कर लिया है। श्री सिंह को वीआरएस शनिवार की शाम से प्रभावी हो गया है। इसका आदेश भी जारी करके केंद्र सरकार को जानकारी दे दी गई है।
इसके साथ ही मुख्य सचिव डा.अनूप चंद्र पांडेय से वरिष्ठ आईएएस अफसरों की सचिवालय से विदाई शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विचार-विमर्श के बाद नए मुख्य सचिव अपने हिसाब से अफसरों की नई टीम बनाएंगे। इससे शासन स्तर पर कई विभागों और पदों पर फेरबदल होगा।
‘हिंदुस्तान’ ने इस खबर को सबसे पहले लिख दिया था। यानी वर्ष 1982 और 1983 बैच के आईएएस अफसरों को सचिवालय से विदा होना होगा। यह प्रोटोकाल, नियम और परंपरा भी है। हालांकि एक-दो इसके अपवाद भी हैं।
नियमानुसार 50 साल से ऊपर के आईएएस अधिकारियों को प्रदेश सरकार अपने स्तर पर वीआरएस मंजूर कर सकती है। उसे केंद्र सरकार को केवल सूचना देनी होती है लेकिन 50 साल से कम आयु के आईएएस अफसरों का वीआरएस केंद्र सरकार ही मंजूर करती है। राज प्रताप सिंह कृषि उत्पादन आयुक्त (एपीसी), अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा और खनन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे। इन पदों से आज उनको मुक्त कर दिया गया है। लेकिन अभी उनके पदों का कार्यभार किसी को नहीं दिया गया है।
खास बात यह है कि राज प्रताप सिंह का इसी जुलाई माह में रिटायरमेंट था और वे पहले ही उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन बनाए जा चुके हैं। राज्यपाल राम नाईक द्वारा शपथ ग्रहण कराए जाने के बाद वे इस पद का कार्यभार संभालेंगे।
रामीरेड्डी को अतिरिक्त चार्ज
प्रमुख सचिव सहकारिता एमबीएस रामीरेड्डी को निबंधक सहकारिता का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंप दिया गया है। इस संबंध में शनिवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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