वाराणसी. ये है यूपी सरकार का बेरोजगार युवकों को
तोहफा, नई नौकरी उन्हें नहीं मिलेगी बल्कि उनकी जगह उन बुजुर्गों को दोबारा
नौकरी पर रखा जाएगा जो पहले ही 62 वर्ष तक नौकरी कर चुके हैं। इस आशय का
शासनादेश जारी हो चुका है। जुलाई से नियुक्तियां भी शुरू हो जाएंगी।
ये है
बीजेपी सरकार का हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने के वायदे का हश्र।
बता दें कि इस नए फरमान में सहायक अध्यापक व प्रवक्ता की नियुक्ति का
प्रावधान तो है पर प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों के लिए
कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में प्रधानाध्यापक व प्रधानाचार्य के
सेवानिवृत्त होने पर स्कूल व कॉलेज का सीनियर ही कार्यवाहक के रूप में काम
करेगा।
वर्षों से बाधित हैं नई नियुक्ति
बता दें कि राज्य
सरकार का यह फरमान जारी हुआ है प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों के लिए। वो
स्कूल जहां वर्षों से शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे है। खास तौर गणित और
विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं कई स्कूलों में। यह समस्या साल दर साल बढती
ही जा रही है। हर साल एक-एक जिले में न्यूनतम 50 शिक्षक सेवानिवृत्त हो
जाते हैं। इनकी जगह नई नियुक्ति हो नहीं रही है। ऐसे में शिक्षकों की तादाद
लगातार घट रही है। इधर शिक्षित युवक बेरोजगार घूम रहे हैं और उधर स्कूलों
में शिक्षक ही नहीं हैं। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने माध्यमिक
स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने का नया तरीका निकाला है। इसके तहत
स्कूलों में रिक्त शिक्षकों के पदों को नई ऊर्जा से नहीं बल्कि बुजुर्गों
से भरा जाएगा। तर्क यह कि जब तक माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग पूरी तरह से
सक्रिय नहीं होता तब तक रिटायर्ड शिक्षकों को ही निर्धारित मानदेय पर तदर्थ
तौर पर नियुक्त किया जाएगा। इससे यूपी के युवाओं में हताशा है।
15 व 20 हजार रुपये मानदेय पर काम करेंगे सेवानिवृत्त शिक्षक
अपर
मुख्य सचिव संजय अग्रवाल की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि
सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक, प्रवक्ता के पूल गठन के लिए जिला विद्यालय
निरीक्षक द्वारा सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक, प्रवक्ताओं से प्रत्येक वर्ष
एक अप्रैल से 20 अप्रैल तक आवेदन पत्र आमंत्रित कर पूल गठन किया जाएगा।
वर्तमान शैक्षिक सत्र 2017-18 चूंकि प्रारंभ हो चुका है, ऐसे में इसके लिए
चयन तत्काल प्रभाव से शुरू होगा। जिला स्तर पर सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक व
प्रवक्ताओं के पूल को माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया
जाएगा। साथ ही जिले के किसी भी विद्यालय में सहायक अध्यापक या प्रवक्ता की
अल्पकालिक रूप से जब भी जरूरत होगी, प्रबंधक, प्रबंध समिति की मांग पर
जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा पूल से शिक्षण कार्य के लिए सेवानिवृत्त
सहायक अध्यापक, प्रवक्ता उपलब्ध काराया जाएगा। इन शिक्षकों का अनुमोदन
संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा किया जाएगा। ऐसे सेवानिवृत्त शिक्षक
शैक्षिक सत्र के बीच में कार्य पर लगाए जाने के बाद ग्रीष्मावकाश प्रारंभ
होने तक कार्य करेंगे। शासन द्वारा अनुमन्य मानदेय का भुगतान जिला विद्यालय
निरीक्षक द्वारा किया जाएगा। बता दें कि इस शासनादेश के मुताबिक 70 वर्ष
से कम आयुवर्ग के सेवानिवृत्त शिक्षकों की ही भर्ती होगी। इसमें सहायक
अध्यापकों को प्रतिमाह 15,000 रुपये और प्रवक्ता को 20,000 रुपये देय
होंगे।
31 मार्च 2018 को वाराणसी मंडल में कुल 183 शिक्षक सेवानिवृत्त हुए। इनका विवरण इस प्रकार है...
जिला कुल शिक्षक प्रधानाचार्य प्रवक्ता सहायक अध्यापक
वाराणसी- 44 08 10 26
जौनपुर- 70 10 12 48
गाजीपुर- 52 10 13 29
चंदौली- 17 02 02 13
ये केवल छलावा है
इस संबंध में पूर्व शिक्षक विधायक
और माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रांतीय प्रवक्ता डॉ प्रमोद कुमार
मिश्र का कहना है कि ये केवल छलावा है। सरकार इसके माध्यम से शिक्षक भर्ती
का कोरम पूरा करना चाहती है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष व विधान परिषद सदस्य
ओम प्रकाश शर्मा इसका विरोध कर चुके हैं। संघ का मानना है कि सेवानिवृत्ति
की उम्र इसीलिए निर्धारित की गई है कि अब संबंधित की कार्यक्षमता कार्य
करने योग्य नहीं। ऐसे में 62 वर्ष की आयु में एक बार सेवानिवृत्त करने के
बाद फिर आठ साल के लिए उसी को काम पर लगाने का कोई मतलब नहीं है। इसकी जगह
युवाओं को पूर्ण कालिक शिक्षक के तौर पर नियुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने
बताया कि हर साल हर जिले में लगभग 200 शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं जबकि
उसके सापेक्ष नियुक्ति का औसत नगण्य है।
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