प्रयागराज।बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित परिषदीय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए वर्ष 2026 की अवकाश सूची जारी कर दी गई है। जारी सूची के अनुसार पूरे वर्ष में त्योहार, जयंती और विशेष दिवसों को
मिलाकर कुल 33 दिन का अवकाश घोषित किया गया है। हालांकि, इनमें से कई अवकाश नियमित छुट्टियों या विद्यालय खुले रहने के कारण प्रभावी नहीं रहेंगे, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों को छुट्टियों का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।अवकाश सूची में शामिल छह अवकाश ऐसे हैं, जिनके दिन विद्यालय खोले जाने की संभावना है, जबकि कुछ पर्व रविवार को पड़ने के कारण छुट्टियों का नुकसान हो रहा है। विशेष रूप से होली और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों पर केवल एक-एक दिन का अवकाश घोषित किए जाने से शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है।
दूर-दराज के जिलों में तैनात शिक्षकों का कहना है कि होली और दीपावली जैसे बड़े पर्व पर एक दिन में घर जाना और वापस लौटना संभव नहीं है। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने सरकार से मांग की है कि इन दोनों पर्वों पर कम से कम दो-दो दिन का अवकाश घोषित किया जाए, ताकि शिक्षक बिना तनाव के परिवार के साथ त्योहार मना सकें।
बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी की ओर से जारी अवकाश सूची के अनुसार संत रविदास जयंती, महाशिवरात्रि, नरक चतुर्दशी (दीपावली) और छठ पूजा इस वर्ष रविवार को पड़ रही हैं, जिससे चार अवकाश स्वतः समाप्त हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में संत रविदास जयंती के अवसर पर विद्यालय खोलकर कार्यक्रम आयोजित किया गया था, ऐसे में इस बार भी विद्यालय खोले जाने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अतिरिक्त 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस), 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) के दिन विद्यालय खोलकर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे इन अवकाशों का भी शिक्षकों और विद्यार्थियों को वास्तविक लाभ नहीं मिलता। सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती और 25 दिसंबर (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जयंती) पर भी विद्यालय खोले जा चुके हैं।
वहीं, दो अवकाश शीतकालीन छुट्टियों और एक अवकाश ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान पड़ने से कुल तीन अतिरिक्त छुट्टियों का नुकसान हो रहा है। इस प्रकार करीब 10 अवकाश ऐसे हैं, जो नियमित छुट्टियों या विद्यालय खुले रहने के कारण निष्प्रभावी हो जाते हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि अवकाशों की पुनर्समीक्षा नहीं की गई तो घोषित छुट्टियों की संख्या कागजों तक ही सीमित रह जाएगी और शिक्षकों-विद्यार्थियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।