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एनपीएस से जीपीएफ फंड ट्रांसफर की मांग तेज, प्रयागराज में शिक्षकों का जोरदार प्रदर्शन

 उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षकों की पेंशन और भविष्य निधि को लेकर बड़ा मुद्दा सामने आया है। प्रयागराज में शिक्षकों ने एनपीएस से जीपीएफ फंड ट्रांसफर न होने पर नाराजगी जताते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से उनकी कटौती की गई राशि अब तक जनरल प्रोविडेंट फंड खाते में स्थानांतरित नहीं की गई है, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

एनपीएस से जीपीएफ ट्रांसफर क्यों बना बड़ा मुद्दा

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के अनुसार:

  • 2016 से लगातार एनपीएस के तहत कटौती की जा रही है

  • संबंधित शिक्षकों को जीपीएफ खाता आवंटित किया जा चुका है

  • इसके बावजूद एनपीएस में जमा राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज जीपीएफ खाते में ट्रांसफर नहीं हुआ

इस देरी के कारण शिक्षकों को पेंशन लाभ, सेवानिवृत्ति योजना और वित्तीय योजना बनाने में गंभीर परेशानी हो रही है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान शिक्षक संगठनों ने सरकार और शिक्षा विभाग के सामने कई मांगें रखीं:

  1. एनपीएस में जमा पूरी राशि को ब्याज सहित जीपीएफ में ट्रांसफर किया जाए

  2. पेंशन और भविष्य निधि से जुड़े मामलों का तत्काल निस्तारण हो

  3. शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए

  4. वेतन विसंगति और पदोन्नति संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए

  5. सरकारी शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाए

लंबे समय से लंबित है मामला

शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर ज्ञापन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी के कारण शिक्षकों में असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है

शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मुद्दों का समाधान न होने पर:

  • शिक्षक कार्य प्रभावित हो सकता है

  • सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है

  • प्रशासन और कर्मचारियों के बीच विश्वास की कमी बढ़ सकती है

निष्कर्ष

एनपीएस से जीपीएफ फंड ट्रांसफर का मुद्दा अब सिर्फ एक वित्तीय समस्या नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षकों के अधिकार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। अगर समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। अब सभी की नजरें सरकार और शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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