उत्तर प्रदेश (प्रयागराज)।उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा परिषद के माध्यम से प्राथमिक और प्रारंभिक स्तर के शिक्षक भर्ती योग्यता मानदंड में बड़ा बदलाव लाने जा रही है। वर्तमान में शिक्षक बनने के लिए जो 2‑वर्षीय
D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजुकेशन) कोर्स आवश्यक है, उसे 4‑वर्षीय B.El.Ed (बैचलर इन एलीमेंटरी एजुकेशन) से बदलने की योजना पर काम चल रहा है। यह बदलाव राज्य में प्राथमिक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को पूरी तरह नया रूप देगा।बदलाव की मुख्य बातें
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अब तक प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए स्नातक करने के बाद दो साल का D.El.Ed कोर्स करना आवश्यक था।
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योजना के तहत अब चार वर्षीय B.El.Ed कोर्स को प्राथमिक भर्ती योग्यता के रूप में लागू किया जाएगा।
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इससे अभ्यर्थियों को चार वर्ष में शिक्षक बनने की योग्यता प्राप्त होगी, जबकि पहले स्नातक + D.El.Ed के कारण कुल अवधि अधिक होती थी।
बदलाव से होने वाले लाभ
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समय की बचत: चार वर्षीय B.El.Ed में स्नातक और शिक्षण प्रशिक्षण दोनों शामिल होंगे।
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जल्दी प्रवेश: इंटरमीडिएट के बाद विद्यार्थी सीधे B.El.Ed में प्रवेश ले सकेंगे और शिक्षक बनने की प्रक्रिया तेज़ होगी।
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गुणवत्ता सुधार: B.El.Ed कोर्स में आधुनिक शिक्षण विधियों और पेडागोजी पर अधिक बल दिया जाएगा, जिससे नवोदित शिक्षकों का प्रशिक्षण अधिक गुणवत्ता आधारित होगा।
कहाँ से शुरू होगा बदलाव?
इस बदलाव को पहले चरण में सात जिलों — प्रयागराज, जौनपुर, गोरखपुर, हापुड़, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी — के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों और संबंधित कॉलेजों में लागू किया जाएगा। बाद में इसे प्रदेश के सभी Teacher Education संस्थानों में विस्तारित किया जाएगा।
आगे की तैयारी
शिक्षा विभाग और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की बैठकें चल रही हैं। इसमें B.El.Ed पाठ्यक्रम संचालन के लिए भौतिक और मानव संसाधन की तैयारी पर चर्चा की जा रही है, ताकि इसे व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
संक्षिप्त प्रभाव
यदि यह बदलाव लागू होता है, तो भविष्य में प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए केवल B.El.Ed डिग्रीधारक उम्मीदवार ही पात्र होंगे। इससे शिक्षक प्रशिक्षण की संरचना में बड़ा बदलाव आएगा और भर्ती प्रक्रिया अधिक संगठित और प्रभावी बनेगी।