उच्च न्यायालय ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। न्यायमूर्ति प्रसाद ने अपने फैसले में लिखा कि सेवा के सभी प्रयोजनों के लिए कर्मचारी की
प्रारंभिक नियुक्ति तिथि ही मान्य होगी, चाहे उसका स्थान बदल गया हो। यदि विभाग द्वारा कोई ऐसा परिपत्र या नियम पारित किया गया है जो स्थानांतरण के आधार पर किसी को जूनियर घोषित करता है, तो वह असंवैधानिक है।Teacher Seniority/बिलासपुर/छत्तीसगढ़ में शिक्षक एलबी (LB) संवर्ग के अंतरजिला स्थानांतरण और वरिष्ठता को लेकर बिलासपुर उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकल पीठ ने शिक्षकों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी का स्थानांतरण एक स्थान से दूसरे स्थान पर किया जाता है, तो उसकी वरिष्ठता में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
Teacher Seniority/ अदालत ने अपने आदेश में कड़े शब्दों में कहा कि पोस्टिंग के नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के आधार पर किसी वरिष्ठ कर्मचारी को उसके जूनियर्स से नीचे नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो स्वैच्छिक स्थानांतरण के कारण अपनी वर्षों की वरिष्ठता खो चुके थे और पदोन्नति की दौड़ से बाहर हो गए थे।
इस मामले की गहराई में जाएं तो याचिकाकर्ता शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 दिसंबर 2010 को प्राथमिक शाला प्रधान पाठक के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में, इन शिक्षकों ने स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों से अपने स्वयं के अनुरोध पर बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से रायपुर जिले में स्थानांतरण की मांग की थी।
चूंकि दोनों जिले एक ही राजस्व संभाग (रायपुर) के अंतर्गत आते हैं और उनका नियंत्रण एक ही लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) संभाग के पास है, इसलिए उनकी वरिष्ठता अक्षुण्ण रहनी चाहिए थी। हालांकि, विभाग द्वारा मार्च 2021 में जारी संशोधित ग्रेडेशन सूची में इन शिक्षकों की वरिष्ठता की गणना उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि के बजाय स्थानांतरण के बाद ज्वाइनिंग की तारीख से कर दी गई। इसके चलते वे अपने ही जूनियर्स से नीचे हो गए और मिडिल स्कूल प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नति के अवसर से वंचित रह गए।
उच्च न्यायालय ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया है। न्यायमूर्ति प्रसाद ने अपने फैसले में लिखा कि सेवा के सभी प्रयोजनों के लिए कर्मचारी की प्रारंभिक नियुक्ति तिथि ही मान्य होगी, चाहे उसका स्थान बदल गया हो। यदि विभाग द्वारा कोई ऐसा परिपत्र या नियम पारित किया गया है जो स्थानांतरण के आधार पर किसी को जूनियर घोषित करता है, तो वह असंवैधानिक है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित विभिन्न कानूनों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ‘स्व-अनुरोध’ और ‘प्रशासनिक आधार’ पर किए गए अंतर-जिला स्थानांतरण के बीच वरिष्ठता को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। किसी भी सरकारी कर्मचारी को महज उसके व्यक्तिगत अनुरोध पर तबादला लेने के कारण उसकी पिछली सेवा के लाभों से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।
अदालत ने राज्य शासन को कड़ा निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता शिक्षकों की वरिष्ठता सूची (ग्रेडेशन लिस्ट) में तत्काल सुधार करे। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि इन शिक्षकों को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि यानी 10 दिसंबर 2010 से ही वरिष्ठता प्रदान की जाए और उसके आधार पर एक नई ग्रेडेशन सूची तैयार की जाए।
साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता शिक्षक अपनी सही वरिष्ठता के आधार पर प्रधान पाठक के पद पर पदोन्नति पाने के पूर्ण हकदार हैं। राज्य सरकार को अब इस ग्रेडेशन सूची को संशोधित कर शिक्षकों को उनके अधिकार और पदोन्नति प्रदान करने की प्रक्रिया को कानून के अनुसार नए सिरे से पूरा करना होगा।
शिक्षकों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा कि विभाग द्वारा तैयार की गई सूची केवल कुछ शिक्षकों को अनुचित लाभ देने और याचिकाकर्ताओं को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
बलौदाबाजार-भाटापारा जो पहले रायपुर जिले का ही हिस्सा था, वहां से रायपुर आना एक ही संभाग के भीतर की प्रक्रिया है, जिसे विभाग ने गलत तरीके से व्याख्यायित किया था। बिलासपुर हाईकोर्ट के इस फैसले ने अब यह सुनिश्चित कर दिया है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं या तबादलों की आड़ में कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों और उनकी सेवा अवधि के दौरान अर्जित वरिष्ठता के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकेगा।
