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अंबेडकरनगर में शिक्षक समायोजन पर बड़ा विवाद, बीएसए पर मनमानी के आरोप

 उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में सरकारी शिक्षकों के समायोजन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि समायोजन प्रक्रिया मनमाने ढंग से और नियमों के विपरीत की गई है। इस मामले ने पूरे जिले के परिषदीय विद्यालयों में असंतोष का माहौल बना दिया है।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

शिक्षक संघों का कहना है कि समायोजन के दौरान:

  • प्राथमिकता नियमों का पालन नहीं किया गया

  • शिक्षकों से विकल्प (Choice) नहीं लिए गए

  • पारदर्शी सूची और स्पष्ट प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई

इन कमियों के कारण कई शिक्षकों को दूरस्थ और असुविधाजनक विद्यालयों में भेज दिया गया, जिससे उनकी सेवा शर्तें और पारिवारिक जीवन प्रभावित हुआ है।

बार-बार बदले गए समायोजन आदेश

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि समायोजन आदेश:

  • बिना स्पष्ट कारण बार-बार बदले गए

  • कुछ शिक्षकों को अनुचित लाभ मिला

  • योग्य और वरिष्ठ शिक्षकों को नजरअंदाज किया गया

इसे शिक्षक समुदाय ने सरकारी शिक्षक स्थानांतरण नीति का खुला उल्लंघन बताया है।

शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें

शिक्षक संगठनों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि:

  1. वर्तमान समायोजन सूची को तत्काल रद्द किया जाए

  2. समायोजन प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से हो

  3. वरिष्ठता, सेवा अवधि और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए

  4. भविष्य में किसी भी समायोजन से पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं

शिक्षा व्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद:

  • शिक्षक मनोबल को प्रभावित करते हैं

  • सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पर असर डालते हैं

  • प्रशासन और शिक्षकों के बीच विश्वास की कमी बढ़ाते हैं

यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह मामला जिलास्तर से प्रदेशस्तर तक फैल सकता है।

निष्कर्ष

अंबेडकरनगर में शिक्षक समायोजन का मुद्दा अब एक गंभीर प्रशासनिक समस्या बन चुका है। शिक्षक समुदाय पारदर्शिता और नियमों के पालन की मांग कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या शिक्षकों को न्याय मिल पाता है।

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