नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश की शिक्षा प्रणाली को रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाने की दिशा में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत अब केवल डिग्री आधारित शिक्षा पर ध्यान
नहीं दिया जाएगा। इसके बजाय कौशल विकास, इंटर्नशिप और व्यावहारिक प्रशिक्षण को शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।🔔 शिक्षा का नया नजरिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि:
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बदलते समय में केवल शैक्षणिक प्रमाण पत्र पर्याप्त नहीं हैं।
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युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यवहारिक ज्ञान और काम करने की दक्षता हासिल करनी होगी।
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इस उद्देश्य के लिए स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को ITI और उद्योग जगत से जोड़ा जाएगा।
👉 लक्ष्य: विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी सीखें, ताकि शिक्षा पूरी होने के बाद उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलें।
💼 इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप का बढ़ावा
सरकार इस दिशा में कदम बढ़ा रही है:
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इंटर्नशिप (Internship): छात्रों को व्यावहारिक काम का अनुभव
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अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship): उद्योगों में प्रशिक्षण और वास्तविक कार्य अनुभव
यह व्यवस्था छात्रों की कार्यक्षमता, अनुभव और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगी।
📚 शिक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
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लंबे समय तक भारत की शिक्षा पुस्तकें और परीक्षाओं तक सीमित रही।
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नई पहल से छात्रों की सोच, कार्यक्षमता और आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
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व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थी पढ़ाई खत्म होने के बाद उद्योगों में तुरंत रोजगार के लिए तैयार होंगे।
🤖 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी शिक्षा
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शिक्षा में AI और डिजिटल टूल्स का अधिक उपयोग किया जाएगा।
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तकनीक आधारित शिक्षा से सीखने के तरीके आधुनिक और प्रभावी होंगे।
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छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार होंगे।
✅ निष्कर्ष
कुल मिलाकर, यह पहल भारत की शिक्षा प्रणाली को:
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कौशल-आधारित
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रोजगारोन्मुख
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उद्योग के अनुरूप
बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अब पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव, तकनीकी दक्षता और रोजगार योग्य कौशल भी मिलेगा।