प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि प्रतीक्षा सूची (Waiting List) में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का कोई स्वतः अधिकार नहीं होता और ऐसी सूची को अनिश्चित समय तक जीवित नहीं रखा जा सकता। इस अहम टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शरण शर्मा की एकलपीठ ने नीरा चौबे सहित चार अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं खारिज कर दीं।
यह फैसला उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो विभिन्न शिक्षक भर्तियों में प्रतीक्षा सूची के आधार पर नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
🔔 मामला क्या था?
याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (UPSESSB) द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 01/2016 के तहत शुरू की गई चयन प्रक्रिया में भाग लिया था।
-
यह भर्ती प्रदेश के
👉 सहायता प्राप्त हाईस्कूल व इंटरमीडिएट विद्यालयों
👉 असिस्टेंट टीचर (LT Grade) पदों के लिए थी -
भर्ती में 22 अलग-अलग विषयों के
👉 कुल 7,950 पद शामिल थे
याचिकाकर्ता चयन सूची में स्थान न पाने के बाद प्रतीक्षा सूची के आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे थे।
⚖️ हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
-
✔️ चयन सूची जारी होने के बाद
👉 रिक्त पदों को भरना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है -
❌ लेकिन
👉 प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं मिलता
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि:
“प्रतीक्षा सूची सीमित अवधि के लिए होती है,
इसे अनिश्चित काल तक जीवित नहीं रखा जा सकता।”
📌 प्रतीक्षा सूची पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि:
-
प्रतीक्षा सूची का उद्देश्य
👉 केवल चयन सूची से किसी के हटने या नियुक्ति न लेने की स्थिति में सीमित अवसर देना है -
प्रतीक्षा सूची
👉 मुख्य चयन सूची का विकल्प नहीं हो सकती -
वर्षों बाद प्रतीक्षा सूची के आधार पर नियुक्ति की मांग
👉 कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है
❗ याचिकाएं क्यों खारिज हुईं?
कोर्ट ने माना कि:
-
चयन प्रक्रिया कानून के अनुसार पूरी की जा चुकी थी
-
प्रतीक्षा सूची की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी थी
-
इसलिए याचिकाकर्ताओं का
👉 नियुक्ति की मांग करना संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं बनता
इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
🧠 इस फैसले का असर किन पर पड़ेगा?
यह निर्णय विशेष रूप से प्रभावित करेगा:
-
🔹 LT Grade शिक्षक भर्ती के प्रतीक्षा सूची वाले अभ्यर्थी
-
🔹 TGT/PGT व अन्य शिक्षक भर्तियों के Waiting List कैंडिडेट
-
🔹 वे अभ्यर्थी जो वर्षों बाद कोर्ट के जरिए नियुक्ति की उम्मीद करते हैं
➡️ यह फैसला भविष्य की भर्तियों के लिए स्पष्ट कानूनी दिशा तय करता है।
🔎 निष्कर्ष
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि:
-
प्रतीक्षा सूची
👉 नियुक्ति का अधिकार नहीं देती -
सरकार पर भले ही रिक्त पद भरने की जिम्मेदारी हो,
👉 लेकिन प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थी नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते -
प्रतीक्षा सूची को
👉 अनिश्चित समय तक जीवित रखना असंवैधानिक है