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ललितपुर में प्राथमिक शिक्षक संघ सक्रिय, शिक्षकों की समस्याओं को लेकर आंदोलन तेज

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में प्राथमिक शिक्षक संघ एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। संघ ने सरकारी प्राथमिक शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न लंबित समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की है। इनमें वेतन, पदोन्नति, चयन वेतनमान, पेंशन, डिजिटल उपस्थिति और शिक्षक समायोजन जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।

शिक्षकों की प्रमुख समस्याएं

प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि लंबे समय से शिक्षकों की कई मांगें प्रशासनिक स्तर पर लंबित हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं हो सका है। प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं:

  • चयन वेतनमान का लाभ समय पर न मिलना

  • वेतन भुगतान में देरी और तकनीकी त्रुटियां

  • पुरानी पेंशन योजना से जुड़ी मांगें

  • डिजिटल हाजिरी प्रणाली से उत्पन्न व्यवहारिक समस्याएं

इन मुद्दों के कारण शिक्षकों में असंतोष और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

शिक्षक संघ की बैठकों में क्या हुआ

ललितपुर में हुई प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठकों में संगठनात्मक मजबूती और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई। संघ ने निर्णय लिया कि:

  • ब्लॉक और जिला स्तर पर नियमित बैठकें की जाएंगी

  • शिक्षकों की शिकायतों को संगठित रूप से प्रशासन तक पहुंचाया जाएगा

  • आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से दबाव बनाया जाएगा

ऑनलाइन उपस्थिति और समायोजन पर नाराजगी

संघ ने ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली और शिक्षक समायोजन नीति को लेकर भी नाराजगी जताई है। शिक्षकों का कहना है कि बिना ज़मीनी परिस्थितियों को समझे लिए गए निर्णय:

  • शिक्षण कार्य को प्रभावित कर रहे हैं

  • शिक्षकों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ा रहे हैं

संघ की मांग है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले शिक्षक संगठनों से संवाद किया जाए।

शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो:

  • सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है

  • शिक्षक मनोबल गिरने से छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है

  • शिक्षा विभाग और शिक्षक समुदाय के बीच विश्वास की कमी बढ़ सकती है

निष्कर्ष

ललितपुर में प्राथमिक शिक्षक संघ की सक्रियता यह दर्शाती है कि शिक्षक कल्याण और अधिकार अब एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। सरकार और शिक्षा विभाग के लिए यह जरूरी है कि वे शिक्षकों की मांगों को गंभीरता से लें और समयबद्ध व पारदर्शी समाधान निकालें। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।

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